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"तू था तो सब था"

तेरे जाने के बाद ये शहर भी सुनसान है, हर मोड़ पे तेरी यादों का मकान है… मैं हँसता हूँ मगर दिल में तूफान है, तेरे बिना अब मेरा कौन है… --- तू था तो सब था, अब कुछ भी नहीं… तू थी तो रंग थे, अब बस धुंधली सी सुबह है कहीं… --- तेरे हाथ की वो गर्मी, अब भी उंगलियों में है, तेरे होंठों की वो हँसी, अब भी खामोशियों में है… लोग कहते हैं वक़्त सब ठीक कर देता है, पर तू लौट आए, बस यही दुआ करता है… --- तू था तो सब था, अब कुछ भी नहीं… तू थी तो रंग थे, अब बस धुंधली सी सुबह है कहीं… --- मैंने चाहा तुझे अपनी साँसों से भी ज़्यादा, तू चली गई, मैंने खुद को भी खो दिया… अब ये आँखें रोती हैं बिना वजह के, क्योंकि वजह थी तू… और तू ही तो खो गया… - (Rain sound fades, piano slow) तू था… तो सब था… अब कुछ भी नहीं… कुछ भी… नहीं…

"असंभव प्रेम: एक लड़के की कहानी"

एक लड़के की कहानी। वह एक सामान्य लड़का था, जो एक छोटे से गांव में रहता था। उसका नाम विक्रम था।


 

 विक्रम अपने परिवार के साथ एक छोटे से घर में रहता था और एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई करता था। 

वह एक सीमित संख्या में दोस्तों के साथ समय बिता सकता था, लेकिन उसके दिल में कुछ अजीब सी ख़्वाहिशें थीं।

एक दिन, विक्रम ने अपने गांव की नई लड़की को देखा। उसका नाम प्रिया था।

 उसकी सुंदरता और उसकी मुस्कान विक्रम के दिल को छू गई। उसका मन बस उसी लड़की के पीछे पड़ गया। वह उसकी दिनचर्या को तबाह करने लगा, सिर्फ ताकि वह प्रिया के पास जाने का बहाना बना सके।

परंतु प्रिया के दिल में विक्रम के लिए कोई अनुभूति नहीं थी। 

वह एक और लड़के को प्यार करती थी, जिसका नाम अर्जुन था।

 अर्जुन गांव में सबसे हंसमुख और बुद्धिमान लड़का था, जिसके चर्चे गांव के हर कोने में फ़ैले थे

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